हजरस व सेवा स्तम्भ रेवाड़ी ने प्रो.डॉ. बलकार सिंह के दलित सत्याग्रह का किया समर्थन

 आईजीयू के प्रोफेसर डॉ. बलकार सिंह की बहाली की उठाई माँग----सेवा स्तम्ब व हजरस व अन्य संगठनों ने सयुंक्त रूप से मीरपुर यूनिवर्सिटी में पहुँचकर निलंबित प्रोफेसर डॉ बलकार सिंह के दलित सत्याग्रह को अपना समर्थन दिया। उपस्थित सभी पदाधिकारियों ने एक स्वर में  प्रदेश सरकार से डॉ.  बलकार सिंह को बहाल करने की माँग की। सेवा स्तंब प्रधान भगतसिंह सांभरिया व महासचिव आर.पी .सिंह दहिया ने डॉ बलकार सिंह से हुई वार्ता के अनुसार  बताया कि यूनिवर्सिटी में हुई सहायक प्रोफेसर की भर्ती में हुई धांधली को उजागर करने की उन्हें ये सजा मिली है, उन पर लगे सभी आरोपों को उन्होंने बेबुनियाद बताया । हजरस प्रधान रमेश अहरोदिया  व पूर्व प्रधान होशियार सिंह अहरोदिया ने कहा कि डॉ. बलकार सिंह जातिगत दुर्भावना के शिकार है।उन पर लगे सभी आरोपों से उन्हें बरी करते हुए उनकी सेवा बहाल की जाए। आज वर्तमान में भी किस कद्र जातिगत द्वेष भावना जीवित है ,ये इसका ताजा उदाहरण है।मैडम लक्ष्मीबाई लिसाना ने कहा कि आज एक इतने पढ़े लिखे और गजेटिड स्तर के कर्मचारी ,जिनके अंडर छात्र पीएचडी कर रहे है,उनके साथ ऐसा हो रहा है तो एक आम कर्मचारी व आम आदमी के साथ तो कुछ भी हो सकता है। आज उन्हें  इतना मजबूर कर दिया गया कि उन्हें दलित सत्याग्रह पर बैठना पड़ा, औऱ वे निशुल्क जूते पालिश कर रहे है । इससे बड़ी शर्म की बात नही हो सकती । उपस्थित सभी संगठनों के पदाधिकारियों ने प्रदेश सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर समय रहते डॉ. बलकार सिंह पुनः सेवा में बहाली के साथ साथ जो उनका साढ़े चार साल में अकैडमिक व प्रमोशन का नुकसान यूनिवर्सिटी की वजह से हुआ है अगर नही पूरा किया गया  ,तो ये आंदोलन एक विकराल रूप धारण करेगा,जिसकी जिम्मेवारी प्रदेश सरकार की होगी । आज इस सत्याग्रह को समर्थन देने वालो में मुख्य रूप से भगतसिंह सांभरिया, आरपी सिंह दहिया, होशियार सिंह अहरोदिया, रमेश अहरोदिया,प्राचार्य राजकुमार जलवा,लक्ष्मी बाई लिसाना,मोनिका मेहरा,गजराज भुड़पुर,सुबे सिंह रेवाड़िया, नरेन्द्र मेहरा ,रामनिवास गोठवाल, रणबीर खड़गवासिया, बिरेन्द्र खालेटिया,राजेश सुलखा,डॉ मंगत सिंह, मनोज तंवर ढोकी आदि काफ़ी संख्या में साथी उपस्थित रहे।

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